काल गणना
लोकानामन्तकृत्कालः कालोन्यः कल्नात्मकः |
स द्विधा स्थूल सुक्ष्मत्वान्मूर्त श्चामूर्त उच्यते ||
अर्थात – एक प्रकार का काल संसार का नाश करता है और दूसरे प्रकार का कलानात्मक है अर्थात जाना जा सकता है |
सौर मास, चन्द्र मास, नाक्षत्रमास और सावन मास– ये ही मास के चार भेद हैं ।
ते मासाश्चकुंर्वधाश्चकिन्द्रसौरसावननाक्षत्भिदात् है मतस --- चान्द, सौर, सावन, नजर ये चार प्रकार के मास होते हैं ।
सौरमास का आरम्भ सूर्य की संक्रांति से होता है । सूर्य की एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति का समय
लोकानामन्तकृत्कालः कालोन्यः कल्नात्मकः |
स द्विधा स्थूल सुक्ष्मत्वान्मूर्त श्चामूर्त उच्यते ||
अर्थात – एक प्रकार का काल संसार का नाश करता है और दूसरे प्रकार का कलानात्मक है अर्थात जाना जा सकता है |
सौर मास, चन्द्र मास, नाक्षत्रमास और सावन मास– ये ही मास के चार भेद हैं ।
ते मासाश्चकुंर्वधाश्चकिन्द्रसौरसावननाक्षत्भिदात् है मतस --- चान्द, सौर, सावन, नजर ये चार प्रकार के मास होते हैं ।
सौरमास का आरम्भ सूर्य की संक्रांति से होता है । सूर्य की एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति का समय
