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व्रत एवं पर्वों के निर्धारण में पंचांग की भूमिका

ज्योतिष शास्त्र के तीन प्रमुख स्कंध हैं - सिद्धांत, संहिता व होरा।
समय (काल) का ज्ञान सिद्धांत आधारित है। इसलिए सिद्धांत शास्त्रों के आधार पर ही कालबोधक पत्र (पंचांग) का निर्माण होता है।
तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण ये पंचांग के पांच प्रमुख अंग है। भारतीय व्रत एवं पर्वों के निर्धारण में पंचांग की भूमिका अहम होती है।
सभी श्रौत-स्मार्त कर्मों की सिद्धि शुभ मुहूर्त पर आधारित है। अतः शुभ कार्यों के शुभारंभ के लिए शुभ मुहूर्त हेतु भी पंचांग आवश्यक है।
ज्योतिषीय सिद्धांत शास्त्रों में

व्रत एवं पर्वों के निर्धारण में पंचांग की भूमिका

व्रत एवं पर्वों के निर्धारण में पंचांग की भूमिका 
ज्योतिष शास्त्र के तीन प्रमुख स्कंध हैं - 
सिद्धांत 
संहिता व 
होरा।
समय (काल) का ज्ञान सिद्धांत आधारित है। इसलिए सिद्धांत शास्त्रों के आधार पर ही कालबोधक पत्र (पंचांग) का निर्माण होता है।
तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण ये पंचांग के पांच प्रमुख अंग है। भारतीय व्रत एवं पर्वों के निर्धारण में पंचांग की भूमिका अहम होती है।
सभी श्रौत-स्मार्त कर्मों की सिद्धि शुभ मुहूर्त पर आधारित है। अतः शुभ कार्यों के शुभारंभ के लिए शुभ मुहूर्त हेतु भी पंचांग आवश्यक है।
ज्योतिषीय सिद्धांत शास्त्रों में मतभेद होने के कारण विभिन्न पंचांगें में

Lunar Eclipse 2017